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Friday, 24 February 2012

' वो '

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*फोन की घंटी लगातार बज रही थी ,वो उठी दिवाकर का फोन था -''दीदी! मुझे आपकी
मदद चाहिए ,मैं बहूत परेशान हूँ,किसी को शेअर नही कर सकता ,बस आप,आप ही मेरी
मदद कर सकती हैं *'' आवाज में बहूत घबराहट स्पष्ट दिख रही थी .पर बिना किसी
भूमिका के वो बोले जा रहा था .
''अरे तुम इतना क्यों घबरा रहे हो ? फिर कोई गबन का मामला है क्या ? तुम्हे
कितनी बार कहा है मैंने ,ये उपर की कमाई तुम्हे ले डूबेगी,आटे में नमक जितना
चलता है पर तुम तो नमक में आटा.....,घबराओ मत जो होगा निपटेंगे ,बताओ क्या हुआ
?'' पद्मा दीदी ऩे पूछा .
''नही फोन पर नही बता सकता बस आप आ जाओ मेरे पास तुरंत जीजू के साथ, नहीं
तो.....................मैं जान दे दूंगा और सबको खत्म कर दूंगा .कल न्यूज़
पेपर में पढ़ लेना '' और दिवाकर ऩे फोन काट दिया .
पद्मा दीदी उसकी बहिन नही थी,यूँ कहने को कोई खून का रिश्ता नही पर ....उस से
परे एक रिश्ता था जिसे शब्दों से बांधना सम्भव नही एक ऐसा रिश्ता जिसकी
ख़ूबसूरती पर ये दुनिया टिकी है .
पद्मा दीदी ऩे घबरा कर वापस फोन लगाया -'' तु मेरा भाई है? कायर ,मुझे शर्म आ
रही है ....ऐसा भाई मेरा? कुछ नही पूछूंगी. कुछ मत बता .मैं रवाना हो रही हूँ
अभी, इसी वक्त . कुछ नही करेगा तु .मैं हूँ ना तेरी दीदी तेरे साथ ,पागल बेटा
मेरा! यूँ घबराते हैं ?.''
दो ड्रेस अपनी और अपने पति की एक बेग में ठूंसते ठूंसते फोन पर पति से
बातकरती जा रही थी पद्मा दीदी .
सब फोन पर ही बता दिया उसने पति से .
'मैं आ रहा हूँ ,तुम तैयार रहो,ए.टी.एम. कार्ड साथ ले लो . ''
''कार रवाना हो गईहै बाबू! दिवाकर हमें आना कहाँ है ? पागल तूने बताया ही
नही कि हमें पहुंचना कहाँ है? तेरा घर किधर है ? तू गाइड करते जाना हम चलते
रहेंगे ,अभी पहुँचते हैं, तू घबराना मत. देख तुझे मेरी कसम है बाबु!,
प्लीज़ '' पद्मा दीदी ऩे
समझाते हुए बोला .
''मैं रवाना हो गया हूँ,आप उधर से आईये, आधे समय में हम मिल जायेंगे, आप
पहुँचिये 'उस ' होटल के
बाहर मैं आपको मिल जाऊँगा '' दिवाकर की आवाज में व्याकुलता ,घबराहट कुछ कम थी
.भीड़ में खोये बच्चे को दूर से जैसे माँ दिख जाए .
लगभग पांच घंटे के सफर के बाद निश्चित स्थल पर दिवाकर दिख गया .अपनी कार के
पास ही खड़ा रास्ते पर नजर टिकाये खड़ा था. पद्मा दीदी और जीजाजी के झुक कर
पैर छूए .
''क्या हुआ बाबा ? इतना परेशान क्यों था ? हमने रास्ता कैसे कटा तुझे
मालूम ? पंख होते तो उड़ कर तेरे पास पहुँच जाती बेटा , पांच घंटे जैसे पांच साल
की तरह निकले हमारे. पानी तक नही पिया रास्ते में '' पद्मा दीदी एक सांस में
सब बोल गई .
कार से एक युवती और एक बुजुर्ग निकले . लडकी गौरी चिट्टी ,कमर से नीचे तक
झूलते बाल ,कोई भी मुग्ध हो जाये एक बार देखे तो . हल्का सा पेट निकला हुआ
,गर्भवती लग रही थी . झुक कर दीदी के पैर छूने लगी.दीदी ऩे बीच में ही रोकते
हुए दिवाकर की ओर देखते हुए पूछा -'' बहु है?'' और बुजुर्ग के नमस्ते का सिर
झुका कर जवाब भी दिया .
अचानक दिवाकर ऩे जवाब दिया -''नही,नही .......आप चलो पहले अंदर बैठते है
मैंने कमरा बुक करा लिया था,फिर बैठ कर धीरज से बात करेंगे .
कमरे में आते ही वो बोला - जीजू ,दीदी ! आप मुझसे ये नही पूछेंगे कि ये लडकी
कौन है ? ये मेरी बहन हो सकती है ,बेटी,भतीजी,भांजी,दोस्त की बहिन ........
कुछ भी, कुछ भी हो सकती है .'इनकी क्या है ये भी नही बताऊंगा दीदी ,प्लीज़
कुछ भी मत पूछना ''
'' नही पूछेंगे कभी नही पूछेंगे कुछ भी ,क्या 'अनमेरिड है ये ?'' मामले की
गंभीरता को एक पल में वो भांप गई .
............................................................................
और सुना,सब सुना . बहूत भावुक थी वो फूट फूट कर रोने लगी, उठ कर लडकी को
गले से लगा लिया .
''ये तुम्हारा दुर्भाग्य है बेटा , सबसे पहले तो तुम्हारे मम्मी पापा ऩे
काबिल लड़का होते हुए स्वीकार नही किया जबकि जाति का,धर्म का लफडा नही था तुम
दोनों के बीच मात्र गौत्र ......उस पर कोर्ट मेरिज के बाद भी सास ससुर ऩे नही
अपनाया ,
फिर भी समय के साथ सब सही हो जाएगा यही सोच तुमने अपना घर बसा लिया कि
बच्चे की सूरत देख कर दादा,दादी ,नाना,नानी मान ही
जायेंगे...............तुम्हारे पति की ट्रक दुर्घटना में ....क्या करें? ''
दीदी ऩे उसके माथे पर हाथ फेरा .
''और आप???? क्या चाहते हैं ? क्या कहेंगे ?'' बुजुर्ग की ओर देखते हुए जीजू
ऩे सवाल उछाला .
'' देखिये साहब ! हमारी इच्छा के खिलाफ इसने जो किया वो ये भुगते ,इसके सास
ससुर के वो इकलौता बेटा था. मैंने उन्हें समझाया ' साहब! आपका बेटा ही आपको
वापस उसकी सन्तान के रूप में मिल जायेगा. पर उनकी बेटी जो ये सब सच्चाई
जानती थी बदल गई एकदम, भाई के मरने के बाद वो ही तो है सारी प्रोपर्टी की
मालकिन, वो क्यों बोलेगी कि शादी की जानकारी उसे थी, घर से निकाल दिया हमे.
मैं कुछ नही जानता .ये हैं रूपये आप इससे छुटकारा दिला दीजिये और 'ये' मर जाए
तो होस्पिटल वालों को कहना कि इसका अंतिम संस्कार कर दे '' यानि वो उस लडकी
के पिता थे .
''आप पिता है? किसी जानवर को इस हालत में नही छोड़ते और आप अपनी खुद की बेटी
को............? इतने निर्दयी कैसे हो सकते हैं आप ? '' पद्मा का चेहरा तमतमा
आया .
''दीदी! हमने शादी की थी ,ये नाजायज नही है ,वो बहूत खुश थे ,करोडपति घर के
इकलौते बेटे थे आज उनका बच्चा .......मेरा कलंक बन गया '' पर्स से एक
सुदर्शन युवक की फोटो और मेरिज सर्टिफिकट निकाल कर उसने दीदी की हथेली पर रख
दी . उसकी हिचकियाँ नही रुक रही थी.
पद्मा दीदी और उनके पति ...........आँखों में आंसू उनके भी थे . लोगों की मदद
जरुर करते थे दोनों ,पर ऐसी घटना ?
वे असमंजस की हालत में थे, सोचा था कोई गबन का मामला होगा यहाँ
तो................अब?
अचानक जीजू ऩे उठ कर उस लडकी के माथे पर हाथ रखा और सहलाते हुए बोले-''घबराओ
मत , सब छोड़ सकते हैं तुम्हे पर हम नही छोड़ेंगे जो होगा देखा जायेगा .क्या इसे
अपनाने की हिम्मत तुममे है ? हो सकता है अकेले सबसे मुकाबला करना पड़े पर हम
हर पल तुम्हारे साथ होंगे बेटा,तुम्हारी दीदी तो पैदा ही इसीलिए हुई है शायद
,पर मुझ से भी ईश्वर कुछ.........''
''चलो सबसे पहले डट कर कुछ खा पी ले फिर रेस्ट करो तुम और तुम्हारी दीदी इस
कमरे में .मैं अपने डोक्टर दोस्त से बात करता हूँ , फिर कब काम आएगा मेरे ? हा
हा हा '' माहोल को हल्का करते हुए उन्होंने ठहाका लगाया, पर क्या यूँ हो पाता ?
.............................................................................
और उसने एक प्यारे से बेटे को जन्म दिया डोक्टर ऩे दीदी को अंदर बुलाया ,बोला
-''देखिये बच्चे की हालत बहूत सिरियस है ,इन्क्युबेटर में रखा है अभी तो . हम
कोशिश कर रहे है ईश्वर सब अच्छा करेगा ''

'' दिवाकर! लड़का हुआ है,पर बहूत सिरियस है ओक्सिजन पर है '' दीदी ऩे वहीँ से
फोन पर सुचना दी ,दिवाकर होस्पिटल तक भी नही आया था होस्पिटल के सामने वाली
होटल में ही रूका हुआ था अभी, फिर भी जाने किस डर से ?
'दीदी यहाँ मेरे बहूत सारे परिचित हैं '
''बच्चा बहूत सिरियस है ,अच्छा हुआ डॉक्टर से कहिये ओक्सिजन मास्क हटा दे
हमारा काम यूँ ही हो जायेगा '' फोन पर दिवाकर का जवाब आया
''दिवाकर तू इंसान है? स्साले कुत्ता है कुत्ता तु . हम तेरी मदद के लिए
इसलिए आगे आये थे कि तु एक बच्चे की हत्या में हमें शामिल करे ? मुझे मालूम
होता तो मैं कतई नही आती कि तु यहाँ ला के ऐसा करेगा ,स्साले कायर .मेरे सामने
मत आना ,दो झापट रखूंगी तेरे ''दीदी गुस्से से कांप रही थी .
होस्पिटल स्टाफ आश्चर्य से उनकी ओर देख रहा था ,शायद वे सब समझ चुके थे.
''ये आपकी....?''
'पहली बार मिल रही हूँ नही जानती कौन है ये? पर जो भी है बदनसीब ही है ,
डोक्टर साहब इस बच्चे को कुछ नही होना चाहिए मैं 'इनको' बोलती हूँ ए.टी.एम .
से रूपये निकला कर लाते हैं ,जाने इनके पास कितने हैं ,नही हैं हम तो सुनते ही
चल दिए थे ,प्लीज़ आप ईलाज करिए ''
वो इन्क्युबेटर के पास गई बच्चा हर सांस में झटके खा रहा था गुलाबी गुलाबी हाथ
पैरो को फैंक रहा था .
पद्मा दीदी थोड़ी देर तक एकटक उस मासूम को देखती रही जाने कौन सा गुबार आँखों
से फूट पड़ा और उनकी हिचकियाँ बंध गई कुछ बच्चे भाग्य में ये सब क्यों लिखा कर
आते हैं ? इनका दोष ? निर्दोष ,फिर भी सजा मात्र ये भुगतते हैं.
इनके आने का किसी को इंतज़ार नही,कोई ख़ुशी नही ,कोई 'सोहर' नही गये जाते,क्या
गलती की इन्होने ? इन्होने तो नही कहा हमें इस दुनिया में लाओ ,हम भी आना
चाहते है . ' पद्मा दीदी सोचे जा रही थी और उतना ही ...............
अचानक एक नर्स ऩे घबराते हुए कहा -''देखिये बच्चा नॉर्मली हो गया था ,वो भी
एकदम ठीक थी ,रोये जा रही थी........... नही बचेगी,जाने क्या हुआ सांस नही ले
पा रही '',
'डोक्टर साहब एक बार उसे बच्चे को दिखा दीजिये ,इस बच्चे को माँ से छूआ दीजिये
,कैसे भी ? कुछ भी करिए .'' दीदी डोक्टर के सामने गिडगिड़ाई.
''इन्क्युबेटर से निकालने पर बच्चा मर जाएगा ''
''मर जाए ,बदकिस्मत पैदा हुआ है, बदकिस्मत मरेगा तो नहीं ,माँ के साथ मर
जायेगा कोई बात नही पर जिन्दा रहा तो .......माँ का आखिरी स्पर्श हमेशा इसके
साथ रहेगा ,डोक्टर साहब '' वो बिलख उठी आज वो सबकी माँ थी उस लडकी की भी उस
बच्चे की भी और उसके जैसे सब बच्चों की .
दोनों को मिला दिया डोक्टर ऩे ,उस लडकी की आँखों से आंसू बहे जा रहे थे ,एक
नजर उठा कर बच्चे को देखा ,और तेज तेज रोने लगी
डोक्टर ऩे चिल्ला कर कहा - 'हटाइए इसे और आप बाहर जाइए '
''नहीं ,नही जाउंगी मैं , लडकी ओर देखते हुए बोली-'' देखो ,अपने बेटे को देखो
.इसके लिए तुम्हे जीना है ,सोचो तुम यूँ हिम्मत हार जाओगी तो इसका क्या होगा ?
कौन बड़ा करेगा इसे ? मम्मा हो ना तुम इसकी ?चलो छुओ इसे और जल्दी बाहर आओ
,मुझे घर नही जाना क्या? जाउंगी ना वापस ? मेरी अच्छी गुडिया ''
उसकी हालत सम्भल गई.
दीदी और उनके पति ऩे आसमान की तरफ नजर उठाई 'तू है ' वो बुदबुदाई .
उस रात थोड़ी देर के लिए डोक्टर ऩे बच्चे को दीदी को दिया उन्होंने बच्चे को
लडकी के पास सुला दिया .
'प्यार करो इसे बेटा ,इसकी तो कोई गलती नही ना? ''
'आज संजय जिन्दा होता तो कितना खुश होता ,रोज नये नाम सोचता,बताता था ,मैंने
नही सोचा था.................''
'बस चुप ,इसे देखो, प्यार करो, अपना दूध पिलाओ ,चलो मैं बताती हूँ ''
देर रात उसकी हालत फिर बिगड़ी और.........................
'दिवाकर अब तो आ ,क्या करें ? बच्चा नर्सरी में है तीन चार दिन रखेंगे . इस
बच्ची का ........? एम्बुलेंस की व्यवस्था कर देते हैं 'बोडी' ले के तुम और
तुम्हारे जीजाजी जाओ ,बच्चे के पास मैं हूँ .'
रात गहरा रही थी दिवाकर आ गया बेहद घबराया हुआ -' इसका बाप कह रहा है 'बोडी'
ले के यहाँ मत आना ,अब मैं क्या करूं ? डर रहे हैं जाति,समाज ,रिश्तेदारों से.
कल वो पूछेंगे नही कि 'लडकी' कहाँ है? इस से अच्छा नही जीजू कि मालूम पड़
जाये सबको कि मर गई वो '
.......................................................
डोक्टर ऩे सिर पर ढेर सारी बेंडेज बाँधी ,खून से भीगी हुई भी ,एक्सीडेंट का
नाम दिया गया,जीजू के चार पांच दोस्तों को उन्होंने बुला लिया था ,सब साथ हो
लिए .जाते ही दिवाकर और जीजू ऩे रिश्तेदारों को कहा -'' सिर एकदम बिलखर
गया था ,खोलना नही जो है जैसे है, दर्शन कीजिये और रवाना कीजिये अर्थी को,नही
नहलाइये मत पानी के छींटे मार दीजिये नये कपड़े 'इसके' उपर ही रख दीजिये '
और घर की बेटी ऩे अपने ही घर से यूँ विदाई ले ली . नही ,नही आसमां भी नही
रोया ,धरती भी नही फटी ,दुनिया क्या कहती ? डर गये थे वे भी शायद .
और पद्मा दीदी ?
ना कोई रिश्ता ना कोई सम्बन्ध,ना जान पहचान पर शायद एक रिश्ता -इंसानियत का
रिश्ता- उसने बांध लिया अपने से उस भावुक औरत को और उसके आंसू रोके नही रुक
रहे थे .
रात दो बजे के करीब नर्स ऩे आ कर कहा ' आपको डोक्टर साहब बुला रहे है '
जाके देखा लेडी डोक्टर ,दो तीन जेंट्स डोक्टर ,दो चार स्टाफ मेम्बर्स और भी
कमरे में मोजूद थे .
'' बेठिये , देखिये हम कभी से यही सोच रहे हैं कि बच्चे का क्या होगा ? आप हम
जिद करके बच्चे को उसके घर वालों को सौंप भी देते है जबरन बुला कर, तो भी वे
इस बच्चे को या तो कहीं फैंक देंगे या इसे मार देंगे ''
'' हाँ मैं भी यही सोच रही हूँ सबसे बड़ी बात अब दिवाकर लौट के आएगा भी या नही
? ''
'' उसका बाप आएगा ,एफ़.आई.आर. की धमकी सुनते ही दौड़ा चला आएगा ,चुपके से कोई
निकल जाये वो बात अलग़ है ,पहचान छुपाये हुए हो ,क्या पता चले तब ? रोज केस
होते हैं ऐसे ,पर अभी .......''- एक जेंट्स डोक्टर ऩे तमतमाते हुए कहा .
'मगर डोक्टर साहब क्या करें ? बच्चे को मरने तो नही दूंगी ,चलो लगता है ईश्वर
मुझे आजमा रहा है 'बेटा तूने जो ये रास्ता चुना है वो देख कितना काँटों भरा है
' दीदी हँस दी .
'' मुझे बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट,लडकी का मेरिज सर्टिफिकेट ,होस्पिटल का ये
कुछ रिकोर्ड चाहिए कल मेरे बच्चों पर कोई ऊँगली उठाये तो.,बाकि मुझे लोग जानते
हैं ,मेरे लिए असम्भव कुछ नही तब ,जब किसी के जीवन का सवाल आजाये
..........'' उनकी आवाज में एक दृढ़ता स्पष्ट दिख रही थी सबको .
''मेम ! आप एक अनजान लडकी ,उसके परिवार के सम्मान ,एक बच्चे के जीवन के लिए ये
सब कुछ कर सकती हैं तो हम क्यों नही ? हम डॉक्टर्स हैं ,जीवन बचाना तो हमारी
ड्युटी है ही ,पर............हम आपके साथ हैं '' एक डोक्टर ऩे सेल्यूट की
मुद्रा में अपने हाथ को सिर की ओर बढ़ाते हुए कहा .
''ईश्वर ऩे मेरा इम्तिहान कदम कदम पर लिया,पर हर वो किसी ना किसी रूप में सदा
मेरे साथ रहा ,आज वो आप सभी के रूप में मेरे साथ है और मेरे पति के रूप में भी
,थेंक्स टु आल ऑफ़ यु .हाँ हम एक बच्चे को भी बचा लेते हैं तो सोचूंगी कुछ तो
अच्छा किया इस जीवन में आ के '' -दीदी ऩे शांत भाव से उत्तर दिया और नर्सरी
के बाहर लगे सोफे पर जा के अपना सिर टिका दिया .
चार दिन बाद डोक्टर ऩे बच्चे को उन्हें सौंप दिया -'जाओ , अपनी यशोदा मैया
के पास '
घर से निकलते समय कर में वे दो थे आज घर की ओर लौटते समय 'तीन' .
एक मेम्बर और बढ़ गया था उनके घर में .
फिर.........................?????
एक कहानी खत्म हुई थी सिर्फ.
एक नई कहानी की शुरुआत हो चुकी थी .
क्या क्या हुआ ?
जाने दीजिये ,पद्मा दीदी ऩे अपनी सोच को परे सरकाते हुए सिर को एक झटका सा
दिया और 'लेक्टोजिन' की बोतल बच्चे के मूंह में टिका दी . मन में सुकून था.
और एक दृढ निश्चय बच्चे के लिए दुनिया से टकरा जाने का ,
वो जानती थी कोई हो ना हो उनके पति हर पल उनके साथ हैं .
--

19 comments:

उपासना सियाग said...

bahut achhi kahani indu ji

उपासना सियाग said...
This comment has been removed by the author.
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

तेरी ये ज़मीं, तेरा आसमाँ, तू बड़ा मेहरबाँ, तू ...

निवेदिता श्रीवास्तव said...

दी ,मन को बहुत बुरी तरह से झकझोर गयी ये घटना .....

संगीता तोमर Sangeeta Tomar said...

बेहद मार्मिक ......यहाँ कुछ बुरे लोग जरूर है तो यह भी सच है कि अभी इस दुनिया में अच्छे लोगों की कमी नहीं है...

sushma 'आहुति' said...

प्रभावशाली प्रस्तुती....

Padm Singh said...

आपकी पोस्टें पढ़ कर कुछ कह पाने की स्थिति नहीं रह जाती... शायद कुछ कहने से बात हल्की रह जाने का डर रहता है... फिलहाल मौन उपस्थिति स्वीकार करें

sushma 'आहुति' said...

मन पर एक गहरी छाप छोडती है आपकी कहानी.... पढ़ी तो थी... पर शायद शब्द कम पड़ गए ये बताने के लिए.... जिसके आप से माफ़ी चाहती हूँ.....

गुड्डोदादी said...

इंदू जी
आशीर्वाद
झकझोर दिया कहानी की घटना में

purushottam bidada said...

यह कहानी नहीं एक सच्चाई है.दी माँ ,आप ही इसमें पद्मा दी हो.आप इंसानियत का साकार रूप हो.यह सच्ची कहानी मानवता का सन्देश देती है.दिल को छुलेने वाली इस मार्मिक कथा का इतना सजीव वर्णन इंसानियत में फिर से विश्वास जगाता है.आप ऐसी ही बनी रहो दी माँ...!

Arvind Mishra said...

सामजिक सरोकार की एक जीवंत अनुकरणीय कथा

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

ईश्वर बड़ा दयालू है सबके लिए रास्ता निकालता है और संसार से किसी न किसी को पीड़ित की सहायता करने भेजता है………………सुंदर चित्रण किया है। सच्ची कह रहा हूँ, मजाक में मत लेना :)

रश्मि प्रभा... said...

khuda aur aap... ant to yahi hona tha. bachcha jug jug jiye

यादें....ashok saluja . said...

बहना याद करने का शुक्रिया !
पद्मा दीदी का रोल तो सिर्फ आप ही कर सकती हैं .
और बहना अपने रोल में हमेशा की तरह टॉप पर है
शुभकामनाएँ !
स्नेह!

संगीता पुरी said...

वाह .. अंत भला तो सब भला !!

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH said...

Ma Sa,
Khadke salute!
Ashish
--
The Dirty Picture!!!

Purshotam Puri Goswami said...

दादी जी, आपको सत सत नमन एव चर्णस्पर्स, मै काफी मंदिरो तीर्थ स्थानो पर गया पर मुजे कही भी ईश्वर कि अनुभूति या मन के शान्ति नहीं मिली, और जब मै आपका ब्लॉग पढ़ता हू और आपसे बात होती है! तो मन बिलकुल शांत हो जाता है,और ऐसा प्रतीत होता है कि सव्यम ईश्वरीय अनुभूति महसूस हो रही है! लेकिन मुजे नहीं लगता है कि मेरी इन बातों पर आपको यकीन हो रहा है, क्योकी मैंने आपके अटूट विश्वास को डगमगया है, फिर भी आप मुजे ये महसूस नहीं होने देते हो कि आप मुजसे नाराज हो,कितना आभागा हू मै, आप भले ही मुजे माफ कर दे, लेकिन वह बीता हुआ पल मै नहीं भूल सकता हू, जब भी मुजे वो पल याद आता है, मुजे अपने आप पर नफरत होने लगती है, वह पल मेरे जीवन मे नासूर कि तरह है, मुजे सदेव आपके आशीर्वाद और स्नेह कि आशा रहती है, पर मेरा दुर्भाग्य जो मुजे हमेशा विपरीत स्थती मे लाकर खड़ा कर देता है

Purshotam Puri Goswami said...
This comment has been removed by a blog administrator.
Purshotam Puri Goswami said...

दादी जी, आपको सत सत नमन एव चर्णस्पर्स, मै काफी मंदिरो तीर्थ स्थानो पर गया पर मुजे कही भी ईश्वर कि अनुभूति या मन के शान्ति नहीं मिली, और जब मै आपका ब्लॉग पढ़ता हू और आपसे बात होती है! तो मन बिलकुल शांत हो जाता है,और ऐसा प्रतीत होता है कि सव्यम ईश्वरीय अनुभूति महसूस हो रही है! लेकिन मुजे नहीं लगता है कि मेरी इन बातों पर आपको यकीन हो रहा है, क्योकी मैंने आपके अटूट विश्वास को डगमगया है, फिर भी आप मुजे ये महसूस नहीं होने देते हो कि आप मुजसे नाराज हो,कितना आभागा हू मै, आप भले ही मुजे माफ कर दे, लेकिन वह बीता हुआ पल मै नहीं भूल सकता हू, जब भी मुजे वो पल याद आता है, मुजे अपने आप पर नफरत होने लगती है, वह पल मेरे जीवन मे नासूर कि तरह है, मुजे सदेव आपके आशीर्वाद और स्नेह कि आशा रहती है, पर मेरा दुर्भाग्य जो मुजे हमेशा विपरीत स्थती मे लाकर खड़ा कर देता है